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Wednesday, October 19, 2011

राजीव गाँधी कृषक साथी योजना

राजस्थान में 30 अगस्त, 1994 से कृषि कार्य करते समय दुर्घटनाग्रस्त होने वाले किसानों व खेतीहर मजदूरों को आर्थिक सहायता देने के लिए 'कृषक साथी योजना राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा शुरू की गई थी जो 22 दिसम्बर, 2004 से 'किसान जीवन कल्याण योजना के नाम से जारी रही। राज्य सरकार ने 9 दिसम्बर 2009 को इस योजना का नाम संशोधित कर 'राजीव गांधी कृषक साथी योजना 2009 कर दिया गया है। इस योजना में राज्य के किसानों, खेतीहर मजदूरों, पंजीकृत पल्लेदार/हमाल/मजदूरों का खेत और मण्डी प्रांगण में कार्य करते समय, गाँव से मण्डी तक आते और लौटते समय दुर्घटना में मृत्यु या अंग-भंग होने पर कृषि उपज मण्डी समितियों के जरिये सहायता प्रदान की जाती है। आइए जानते हैं योजना में मिलने वाला लाभ किन परिस्थितियों में दिया जाता है-
  • किसानों और खेतीहर मजदूरों द्वारा कृषि कार्य के दौरान कृषि उपकरणों व यंत्रो का उपयोग करते हुए।
  • सिंचाई हेतु कुआं खोदते समय, ट्यूबवेल स्थापित करते समय एवं उसे संचालित करते समय बिजली का करन्ट लगने पर या खेत पर से गुजरने वाली विद्युत लाइन के क्षतिग्रस्त हो कर गिरने से मृत्यु या अंग-भंग होने पर भी।
  • फसलों पर रासायनिक दवाइयों का छिड़काव करते समय।
  • किसी भी मण्डी प्रांगण व राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित क्रय केन्द्रों पर आते-जाते अथवा कृषि यंत्रों का उपयोग करते समय।
  • मण्डी में बोरियों की धांग लगाते समय।
  • मण्डी प्रांगण या खेत में ट्रैक्टर ट्रॉली, ऊँट, बैल या भैंसा गाड़ी के उलट जाने पर।
  • मण्डी प्रांगण में कार्यरत पल्लेदार/हमाल/ मज़दूर की मण्डी प्रांगण में कृषि विपणन कार्य करते समय।
  • अपने या किराये के साधन जिसमें काश्ताकार स्वयं हो, मण्डी में कृषि उपज लाते या ले जाते समय।
  • काश्तकार/खेतीहर मज़दूर के कृषि प्रयोजनार्थ टै्रक्टर, बैलगाड़ी, ऊँटगाड़ी आदि से खेत से घर लौटते या जाते समय।
  • कुट्टी/कुत्तर काटने की मशीन अथवा कृषि संयंत्रों से किसान व मज़दूर, पुरूष या महिलाओं के केश (बाल) मशीन में आने से हुई दुर्घटना पर।
  • खेत पर कार्य करते हुए साँप, जहरीले जानवर या ऊँट के काटने पर।
  • कृषि कार्य करते हुए आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु या अंग-भंग होने पर।
  • कृषि अथवा कृषि विपणन कार्य करते समय रीढ़ की हड्डी टूट जाने या सिर में चोट लगने से कोमा में जाने या इससे दो अंगों के स्थायी रूप से नाकारा होने पर।
  • कृषि सुरक्षा, पशु चराई हेतु पेड़ों की छंगाई या फसल की रखवाली करते समय दुर्घटना में काश्ताकार या मज़दूर की मृत्यु या अंग-भंग होने पर।
सहायता समिति
सहायता राशि स्वीकृति हेतु मण्डी समिति स्तर पर एक सहायता समिति का गठन किया गया है जिसमें कृषि उपज मण्डी समिति का अध्यक्ष, सचिव, स्थानीय प्रशासन प्रतिनिधि और राज्य बीमा विभाग का एक प्रतिनिधि (पूर्व में राज्य बीमा विभाग के प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य नहीं थी जिसे अब राज्य बीमा के प्रतिनिधि एवं सचिव मण्डी समिति की उपस्थिति अनिवार्य की गयी है ताकि प्रकरणों का शीघ्र एवं विवाद रहित निष्पादन हो सके।) होती है। समिति की बैठक मण्डी समिति स्तर पर प्रतिमाह आवश्यक रूप की जाती है। यह योजना सामाजिक सरोकार से सम्बन्धित है इसलिए एक बार प्रकरण सहायता समिति द्वारा निरस्त किये जाने के बाद किसी भी स्तर पर पुनर्विचार नहीं किया जाता तथा इस समिति का निर्णय अन्तिम होता है।
दावे के निपटाने की प्रक्रिया एवं समयावधि
दुर्घटना घटित होने के पश्चात यथाशीघ्र सहायता राशि प्राप्त करने के लिए संबंधित कृषि उपज मण्डी समिति के कार्यालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए, क्योंकि दुर्घटना के 6 माह पश्चात प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर किसी भी स्थिति कोई विचार नही किया जाता।
पुनर्भरण प्रक्रिया
सहायता समिति की बैठक में निपटाए गए मामले के पुनर्भरण हेतु मण्डी समिति के सचिव द्वारा राज्य बीमा विभाग को एक सप्ताह में आवश्यक रूप से भेजे जाते हैं। इलाज के खर्च का पुनर्भरण करवाने का दायित्व राज्य बीमा विभाग का होता है, क्योंकि यह विभाग ही इस योजना का सेवा प्रदाता है। मण्डी समिति के सचिव निस्तारित प्रकरणों की पत्रावली पुनर्भरण से पूर्व जिला मुख्यालय पर पदस्थापित उप/सहायक निदेशक राज्य बीमा विभाग को भेजते हैं और उप/सहायक निदेशक राज्य बीमा विभाग द्वारा पुनर्भरण की कार्यवाही सम्पादित की जाती है तथा पुनर्भरण की राशि सम्बन्धित मण्डी समितियों को सीधे ही राज्य बीमा विभाग द्वारा भिजवाई जाती है।
पुनर्भरण प्रकरणों की हेतु समिति
निदेशालय स्तर पर प्रत्येक माह की 20 तारीख अथवा उस दिन अवकाश होने पर अगले कार्य दिवस में प्रकरणों के पुनर्भरण की समीक्षा हेतु राज्य बीमा विभाग के अतिरिक्त निदेशक के साथ एक बैठक आयोजित की जाती है, जिसमें निदेशालय स्तर पर मुख्यलेखाधिकारी, उप निदेशक (राजीव गांधी कृषक साथी योजना) की सदस्यता वाली एक समिति बनी हुई है जो यह समीक्षा करती है कि कोई प्रकरण अनावश्यक रूप से लम्बित न रहे।
सहायता हेतु आवेदन प्रक्रिया
इस योजना के अन्तर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए प्रार्थी को अपने क्षेत्र से सम्बन्धित कृषि उपज मण्डी समिति में आवेदन करना होता है। योजना में आवेदन-पत्र के साथ निम्र कागजों की आवश्यकता होती है:
  •  दावा करने वाले द्वारा भरा गया एक दावा प्रपत्र।
  • मण्डी समिति स्तरीय समिति द्वारा भुगतान का सिफारिशी प्रपत्र।
  • चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र।
 
(सर्पदशं एवं कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव के कारण मृत्यु होने की स्थिति में राजकीय चिकित्सक का प्रमाण-पत्र एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट अथवा मौके पर तैयार पंचनामे पर दो सरकारी कर्मचारियों एवं सम्बन्धित चिकित्सक जिसने चिकित्सा प्रमाण-पत्र जारी किया है, के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। ज्ञात रहे मृत्यु का कारण गलत साबित होने पर पंचनामें पर हस्ताक्षरकर्ता व्यक्तियों का समान रूप से व्यक्तिगत उत्तरदायित्व होता है तथा मृत्यु का कारण गलत साबित होने पर पंचनामे पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही करने हेतु सम्बन्धित विभाग को मंडी समिति सचिव द्वारा लिखा जाता है।)
जांच सूची-
  •  प्रथम सूचना रिपोर्ट -अगर नहीं है तो कारण
  •  पोस्टमार्टम रिपोर्ट - अगर नही है तो कारण
  •  पंचनामा
  •  साँप/जहरीला जानवर काटने पर मृत्यु होने पर सरकारी चिकित्सक का प्रमाण-पत्र या  चिकित्सालय के ओ.पी.डी.रजिस्टर का क्रमांक व दिनांक।
  • दावेदार किसान या मज़दूर द्वारा उपज बेचकर वापस जाते वक्त मृत्यु होने पर मण्डी का गेट पास/विक्रय पर्ची/ अमानत पर्ची।
  • रसायनिक दवाइयों के प्रभाव से मृत्यु होने पर विसरा (एफ.एस.एल.) भेजने के रजिस्टर में क्रमांक और दिनांक।
  • विधिक दावेदार कृषक का 10 रू. के नॉन ज्यूडिशिअल स्टाम्प पर शपथ-पत्र।
  • अंग-भंग होने की स्थिति में दावेदार का सरकारी अस्थि रोग विशेषज्ञ का चिकित्सा प्रमाण-पत्र मय सत्यापित फोटो/डाक्टर की पर्ची/दवाइयों के बिल आदि।
  • दावेदार कृषक व उससे संबंधित भूमि की खसरा, गिरदावरी रिपोर्ट।
  • दावेदार का फोटो।
  •  अगर मृतक मज़दूर है तो जिसके खेत में कार्य कर रहा था उसके मालिक का शपथ-पत्र एवं खसरा गिरदावरी।
  • दावेदार कृषक की पहचान हेतु राशनकार्ड, वोटर पहचान-पत्र, बैंक पासबुक, जमीन पासबुक, नरेगा जॉब कार्ड आदि की सत्यापित फोटोप्रति।
  • मृत्यु होने की स्थिति में कृषि कार्य करते हुए मृत्यु होने का संबंधित उपखण्ड अधिकारी द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र।

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