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Friday, March 16, 2012

पानी की परेशानियां

ग्रामीण क्षेत्र से अदालतों में आने वाला विवादों का एक बड़ा हिस्सा पानी को लेकर होता है। सिंचित क्षेत्र में इनकी तादाद कुछ और बढ़ जाती है। हालांकि इसके लिए सिंचाई व जल निकास अधिनियम 1954, अलग से है, पर किसानों में पानी के लिए होने वाले झगड़े कानून पढ़ कर नहीं होते। इस आलेख के माध्यम से हमारा प्रयास रहेगा कि किसान कानून में दिए गए अपने अधिकारों के बारे में जाने, ताकि अनजाने में होने वाले अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। आइए संक्षेप में जानते हैं कि क्या है यह कानून व्यवस्था-
पानी को लेकर ज्यादातर विवाद बारी, बारी के समय, खाळा भराई आदि को लेकर होते हैं। बारियों के बारे में एक पूरा लेख इसी अंक में अन्यत्र छपा है ज्यादा जानकारी के लिए उसे जरूर पढ़ें। संदर्भ के लिए थोड़ी सी बात कर लेते हैं। सामान्यत: सिंचाई की परेशानियां उन क्षेत्रों में पाई जाती है, जिनमें अधिकांशत: सिंचाई व्यवस्था का स्तर अच्छा नहीं होता तथा सिंचाई के समय में एवं जल वितरण व्यवस्था भी ठीक नहीं होती। सिंचाई पानी के समान एवं न्यायसंगत वितरण को स्थानीय भाषा में बारीबंदी कहा जाता है। सिंचाई व जल निकास अधिनियम 1954 व नियम 11/4 के अनुसार अधिशाषी अभियंता आवश्यकता होने पर बारीबंदी लागू करने के लिए सक्षम है। इसके अतिरिक्त अगर जल वितरण एवं व्यवस्था किसी चक में समुचित नहीं है, तो इस चक का कोई भी किसान समुचित बारीबंदी लागू करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकता है। इन प्रार्थना-पत्रों पर फीस टिकटों के माध्यम से ली जाती है, जिसकी वजह से यह मामला कचहरी के नियमों के अंतर्गत आता है। सिंचाई परियोजना में प्रार्थना पत्रों पर कचहरी फीस में एक रुपये की टिकट लगाने का प्रचलन है।
खाळा भराई समय एवं सिंचाई क्रम: प्रथमवार बारीबंदी कायम करते समय सिंचाई का क्रम खाले के दाईं तरफ के नाकों से किया जाता है। दो वर्ष पश्चात बारीबंदी संसोधित करते समय यह क्रम बायीं तरफ रखा जाता है। पक्के खाळों के संदर्भ में अतिरिक्त भराई के लिए समय दो नक्कों वाले मुरब्बे पर 8 मिनट और अतिरिक्त सिंचाई समय एक नक्के वाले मुरब्बे पर 10 मिनट प्रति मुरब्बा। कच्चे खाळों की सूरत में गंगनहर क्षेत्र में 15 व 20 मिनट व भाखड़ा नहर क्षेत्र में 20 व 25 मिनट क्रमश: प्रति मुरब्बा दिया जाता है। विशेष परिस्थितियों में मौके की जांच सक्षम अधिकारी या अधिशाषी अभियंता द्वारा जांच के बाद समय बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
निकाळ:
कच्चे खाळे वाले चकों में निकाळ का समय प्रति मुरब्बा 10 मिनट काटा जाता है और पक्के खाळे होने पर केवल पांच मिनट प्रति मुरब्बा ही काटा जाता है। खाळा निकाळ का लाभ चक के खाळे की सबसे लम्बी शाखा को दिया जाता है। जहां एक ही मुरब्बे में एक से अधिक किसानों के बीच निकाळ का विवाद हो, वहां उनके क्षेत्र के अनुपात से बारी-बारी निकाळ दिये जाने की व्यवस्था की जाती है। किसी चक में यदि अधिकतम लम्बाई की दो या अधिक खाळा शाखाएं समान दूरी की हों तो निकाळ उनकी टेल पर पडऩे वाले मुरब्बों को बारी-बारी से दिया जाता है। यदि सबसे लम्बी शाखा या शाखाओं की टेल पर स्थित मुरब्बे वाले निकाळ नहीं लेना चाहे, तो टेल के मुरब्बों से ऊपर वाले पहले मुरब्बे वाले किसानों को निकाळ दिया जाता है। यदि ऐसे मुरब्बों वाले किसान भी निकाळ न लेना चाहें, तो निकाळ की नीलामी की जाती है और सबसे अधिक निकाळ समय हेतु सहमत होने वाले किसान को दिया जाता है और उस समय की क्षतिपूर्ति टेल के हकदार मुरब्बे वाले किसानों से की जाती है।
यदि अधिशाषी अभियंता उचित समझें और निर्णय लें, तो दो या दो से अधिक भूमि खण्डों, जो एक ही मालिक के हों, पानी के क्रम का एकीकरण कर सकते हैं। जहां तक सम्भव हो, प्रत्येक किसान की भूमि के लिए जो नक्का स्वीकृत हो, उसी पर बारी बांधी जाती है। फिर भी यदि अधिशाषी अभियंता विशेष परिस्थितियों में एकीकरण किया जाना आवश्यक समझे, तो एक ही मालिक की भूमि, जो आगे पीछे या बगल के मुरब्बों में एक ही शाख पर स्थित हो, का चाहे गये एकीकरण कराने के स्थान पर स्थित भूमि के क्षेत्रफल की बराबर सीमा तक कर सकता है।
हिस्से ठेके पर दी गई या रहन पर ली गई भूमि तथा बहाव, लिफ्ट द्वारा सिंचित अनकमाण्ड व अस्थायी रूप से सिंचित अनकमाण्ड भूमि व बयात की बारी का एकीकरण अन्य भूमि के साथ नहीं किया जाता। इसी प्रकार भूमि की बारी उसके लिए स्वीकृत नक्के पर ही रखी जाती है। विशेष परिस्थितियों में इस प्रकार की हिस्से ठेके पर या रहन पर ली हुई भूमि की बारीबंदी उपनिवेशन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मालिक के नाम बांधी जाती है। बारीबंदी की पर्ची मालिक का मुखत्यारनामा प्रस्तुत करने पर उस भूमि पर काबिज किसान को दी जा सकती है।
बारीबंदी की तैयारी व लागू करने का समय:
1. चक की बारीबंदी इस तरह बनाई जाती है कि पूरा चक्कर एक ही सप्ताह यानी 168 घण्टों में पूरा हो जाए।
2. यदि एक पत्थर पर एक से अधिक नक्के हों, तो पहले वर्ष बारी बायीं तरफ वाले व दूसरे वर्ष दाहिने तरफ वाले नक्के के मुरब्बे वाले काश्तकार को दी जाती है।
3. चक में बारी हफ्ते के पहले दिन यानी सोमवार की सुबह 6 बजे व बारी तब्दील करने पर सायं 6 बजे रखा जाता है, यह क्रम साल दर साल चलता रहता है। इसी प्रकार एक ही नक्के पर एक से अधिक किसानों की भूमि पड़ती है तो उसका क्रम भी जिसकी भूमि पहले आती है, उसको पहले तथा बाद की भूमि आने के बाद का क्रम रखा जाता है।
4. पटवारी द्वारा बारीबंदी की एक रिर्पोट तैयार की जाती है, जिसमें खेत मालिक या किसान का नाम, बारी का समय जिसमें भराई, खुलने और बंद करने का समय और नक्के का जिक्र होता है। पटवारी इस सारणी में बारीबंदी तैयार करके जिलेदार को प्रस्तुत करता है। जिलेदार खातेदारों के एतराज एवं सुनवाई के बाद आवश्यक सुधार करके चार प्रतियों में इस बारीबंदी की जांच करता है और अपने स्तर पर एतराजों की सुनवाई करने के बाद अपनी राय तथा टिप्पणी सहित बारीबंदी अधिशाषी अभियंता को प्रस्तुत करता है।
5. बारीबंदी केस प्राप्त होने के बाद अधिशाषी अभियंता खातेदारों को उनके एतराज एवं उनकी आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए नोटिस जारी करता है। एतराजों की सुनवाई एवं बारीबंदी में सुधार यदि आवश्यक हों, करने के बाद अधिशाषी अभियंता बारीबंदी स्वीकृत करके जिलेदार को इसको लागू करने हेतु भेजता है, स्वीकृत बारीबंदी की प्रतियां उप-समाहर्ता एवं सहायक अभियंता को भी भेजी जाती हैं।
6. जब जिलेदार को स्वीकृत बारीबंदी प्राप्त होती है, वह इसे निकटतम सोमवार (सम्भवत: बंदी के मध्य खातेदारों को आवश्यक सिंचाई पर्ची देने के बाद) को लागू कर देता है और बारीबंदी प्रारम्भ करने की तिथि को संबंधित उप-समाहर्ता एवं सहायक अभियंता को अवगत करवाता है।
पुनर्विचार (अपील) : यदि कोई खातेदार अधिशाषी अभियंता द्वारा स्वीकृत बारीबंदी से सहमत नहीं है, तो वह इसके विरुद्ध पुनर्विचार (अपील) हेतु प्रार्थना कर सकता है। पुनर्विचार की प्रार्थना बारीबंदी स्वीकृति के एक पखवाड़े की अवधि के अंदर अधीक्षण अभियंता को की जाती है। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता का निर्णय अन्तिम होता है। चूंकि बारीबंदी स्वीकृति के विरुद्ध नियमानुसार अपील करने का प्रावधान है। अत: यह वांछनीय नहीं होगा कि अधिशाषी अभियंता इसमें बार-बार परिवर्तन करें। यदि किसी पक्ष को इस संबंध में एतराज हो, तो वह अधिशाषी अभियंता के निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार की प्रार्थना कर सकता है।
बारीबंदी में रात-दिन का क्रम: स्वीकृत बारीबंदी में एक वर्ष की अवधि के बाद दिन से रात या रात से दिन में परिवर्तन होता है। चूंकि किसान अपना कृषि कार्यक्रम खरीफ ऋतु के प्रारम्भ में तैयार करता है। अत: बारीबंदी में दिन से रात या रात से दिन का परिवर्तन 15 अप्रेल से प्रभाव में लाया जाता है। जो बारीबंदी 15 अक्टूबर से प्रारम्भ होती है, उसमें दिन से रात अथवा रात से दिन का क्रम 15 अप्रेल से किया जाता है। यदि पहले चार महिने में इस क्रम में परिवर्तन करने की आवश्यकता न हो, तब यह परिर्वतन अप्रेल या डेढ़ साल बाद किया जाता है। बारीबंदी में दिन से रात या रात से दिन के क्रम में परिवर्तन लाते समय इन बातों को ध्यान में  रखा जाता है-
1. रात-दिन का क्रम बदलते समय 12 घण्टे का अंतर दिया जाता है, मतलब यह है कि यदि बारीबंदी प्रात: 6 बजे प्रारम्भ हुई थी, तो परिवर्तित बारीबंदी सायंकाल 6 बजे से प्रारम्भ होगी।
2. यदि सिंचाई का क्रम बाईं से दाईं ओर है तो दो वर्ष के बाद इसे दाईं से बाईं ओर किया जाता है, और इसका उल्टा भी किया जाता है।
3. रात-दिन का क्रम बदलते समय बारी के एकीकरण में चार साल तक कोई परिवर्तन नहीं किया जाता।
4. यदि किसान पारस्परिक रूप से सहमत हों, तो 12 घण्टे के वार्षिक परिवर्तन के साथ बारीबंदी को स्थायी कर दिया जाता है। इस तरह की बारीबंदी के दो सेट तैयार किए जाते हैं ताकि दिन-रात का वार्षिक परिवर्तन स्वत: ही लागू हो जाए।
बारीबंदी में नए क्षेत्र सम्मिलित करने का तरीका
1. सामान्यत: जो नए क्षेत्र बारीबंदी में शामिल किए जाते हैं, उन्हें दो श्रेणियों में बांटा जाता है। पहले वे नये क्षेत्र जो नए सिंचित क्षेत्र घोषित किए गये हों। दूसरे वे क्षेत्र जो किसी न्यायालय में विवादास्पद हों और बाद में न्यायालय के निर्णय के अनुसार बारीबंदी में शामिल किए गए हों।
2. यदि किसी क्षेत्र की फसल की अवधि के बीच में सिंचित घोषित किया जाता है, तो ऐसी अवस्था में उस क्षेत्र को अगली फसल की ऋतु से प्रारम्भ होने वाली बारीबंदी में ही शामिल किया जाता है।
3. विवादास्पद क्षेत्र जिसका निर्णय किसी न्यायालय में विचाराधीन हो और जिसका अन्तिम रूप से निर्णय फसल ऋतु के बीच हुआ हो, उसे न्यायालय के निर्णय के अनुसार माना जाता है। यदि किसी मामले में न्यायालय के निर्णय से किसी समय-विशेष का पता न लगता हो तो उस अवस्था में उस क्षेत्र की आगामी फसल के आरम्भ से शामिल या हटाया जाता है।
4. ऐसे विवादों में जहां एक सिंचित क्षेत्र उपनिवेशन या राजस्व विभाग द्वारा किसी किसान के पक्ष में निरस्त कर दिया गया हो, परंतु संबंधित किसान द्वारा बाद में अधिकृत न्यायालय से स्थगन आदेश ले लिया हो, तो ऐसे में क्षेत्रीय सिंचाई अधिकारियों को स्थगन आदेश मानते हुए संबंधित भूमि को सिंचाई का पानी जारी रखने दिया जाता है।
दोषी किसानों का पानी बंद करना और पुन: प्रारम्भ करने का तरीका।

1. ऐसे किसानों को जिन्होंने दो या इससे अधिक फसलों को सिंचाई बकाया जमा ना करवाया हो, राजस्थान सिंचाई एवं जल निकास अधिनियम 1955 के नियम की धारा 10 के अन्तर्गत सिंचाई पानी की सुविधा से वंचित किया जा सकता है। ऐसा करने से पूर्व दोषी किसानों को नोटिस दिया जाता है और नियम 10 (2) (3) (4) के अन्तर्गत कार्यवाही की जाती है।
2. इस नियम के अन्तर्गत कार्रवाही करने के लिए पटवारी ऐसे दोषी किसानों की सूची तैयार करता है, जिनके नाम दो फसलों से ज्यादा बकाया निकलता हो। ऐसी सूचियां 31 जनवरी व 31 जुलाई को तैयार की जाती है। दोषी किसानों को दिये जाने वाले नोटिस चकों की सूची सहित जिलेदार को प्रस्तुत किये जाते हैं। उसके बाद जिलेदार इन सूचियों एवं नोटिसों की जांच करके अधिशाषी अभियंता को अपनी टिप्पणी के साथ भेजता है।
3. अधिशाषी अभियंता नोटिस पर हस्ताक्षर करके जिलेदार को कार्यवाही हेतु आवश्यक निर्देश देता है और एक प्रति अपनी राय के साथ अधीक्षण अभियंता को भेजता है। अधीक्षण अभियंता ही दोषी किसानों को सिंचाई पानी की सुविधा से वंचित करने के आदेश देता है।
4. जिन दोषी किसानों को अगस्त में बकाया जमा करने के लिए नोटिस दिया गया था एवं जिन्होंने 30 सितम्बर तक बकाया जमा न कराया हो उन्हें 15 अक्टूबर की संशोधित बारीबंदी में सिंचाई पानी की सुविधा से वंचित कर दिया जाता है। इसी प्रकार फरवरी वाले दोषियों ने 31 मार्च तक बकाया जमा नहीं करवाया हो तो उन्हें 15 अप्रेल से सिंचाई सुविधा से वंचित कर दिया जाता है।
5. ऐसे दोषी किसान जिन्होंने अपनी सिंचाई बारी समाप्त हो जाने के बाद सिंचाई बकाया जमा करा दिया हो, को आगे की फसल ऋतु से पुन: पानी की सुविधा मिल जाती है, परंतु उन्हें चालू फसल ऋतु में पानी की सुविधा नहीं मिलती।

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